डॉ कनैयालाल माली ‘उत्सव’
शीर्षक…. चल उठ खड़े हो
चल उठ खड़े हो, अभी सफर बाकी है,
न रुकना है, न झुकना है,अभी सफर बाकी है।
यह जिंदगी है जिंदा दिलों की यारों,
जिंदगी का नाम रोशन करना हीं होगा।
तूफानों से लड़ना और टकराना हीं होगा ,
हवाओं को चीरते आगे बढ़ना हीं होगा।
चल उठ खड़े हो, अभी तो सफर बाकी है।
यह पथ है ही, तेरी अग्नी परीक्षाओं का….
परीक्षाओं को सरल बनाना हीं होगा,
झुक जाएगी कठिनाइयां तेरे आगे दोस्त।
कह देगी यह परीक्षाएं तेरे आगे….
…..… तू जीता और मैं हारी, हीरो…
चल उठ खड़े हो अभी सफर बाकी है,
शुन्य में से सर्जन करना हीं होगा।
जिंदगी से लड़ा तो कुछ भी नहीं लड़ा…
हौसला बुलंद रख जिंदगी को जितना हीं होगा।
जिंदगी मिली है कुछ करके दिखाने के लिए,
लोग देखेंगे कहेंगे था एक बाहुबली नेक बंदा।
बस यही रहेगी यादें अंतिम समय की तेरी…
बन जाएगी जिंदगी एक प्रेरणा स्रोत लोगों के लिए।
अस्तु
डॉ कनैयालाल माली ‘उत्सव’
– -आध्यात्मिक लेखक
अहमदाबाद (गुजरात)
Email ID utsav.writer@gmail.com
Mobile number 9913484546
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