लेखक: डॉ कनैयालाल माली ‘उत्सव’
शिर्षक.. तू हैं तो डर नहीं लगता
तू हैं तो…. डर नहीं लगता हैं…2
तू हैं तो…… गम नहीं लगता हैं…2
तेरी याद में….. मैं, सोती हूं…2
तेरी याद में…. मैं, जग जाती हूं….2
तेरी याद में….. हर गम, भूल जाती हूं..2
तेरी याद में…. मैं सदा खुश रहती हूं…2
तेरी याद में….. मैंने सब कुछ छोड़ा है..2
तेरी याद में….. मैंने सब कुछ पाया है…2
तेरी याद ही,…. मेरा दीदार है…2
तेरी याद ही,….. मेरी तकदीर है…2
तेरी याद में,… मैं मेरा भाग्य लिखती हूं…2
तेरी याद में,….. मैं जोगन बन गई….2
तेरी याद की,…. में मुरली बन गई …2
तेरी याद में,……. मैं हर करम करती हूं…2
तू है तो,….. डर नहीं लगता है…2
तू है तो,……. गम नहीं लगता है…2
तेरी याद में,……मैं सोती हूं..2
तेरी याद में,…. मैं जग जाती हूं…2
तू है तो….. … डर नहीं लगता है..
तू है तो….. मैं अपने को समझ पाई हूं…
तू है तो….. मैं अब अकेली नहीं हूं….
तू है तो…. हर पल साथ है तेरा …
तू है तो….. अब कोई शिकवा-शिकायत नहीं है…
तू है तो…. मेरे सर पर, सदा हाथ हैं बाबा तेरा…
डॉ. कनैयालाल माली ‘उत्सव’
आध्यात्मिक लेखक
ID utsav.writer@gmail.com
Mo 9913484546
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